वार्षिककार्यक्रम

नगरीय शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना  2017-18

 

प्रान्त की वार्षिक योजना अनुसार सत्र 2017-18 हेतु खेल कैलेंडर इस प्रकार रहेगा.

 

 

 

 

विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है-

 

ग्रामीण शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना  2017-18

वनवासी शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना  2017-18

अप्रेल

1.     सुंदरकांड का पाठ एवं हवन पूजन के साथ विद्यालय प्रांरभ  हुआ प्रतिदिन 5 अभिभावकों को प्रार्थना स्थल पर सरस्वती पूजन करानें हेतु आमंत्रित किया जाता है।

मई

1.     समिति एवं समस्त आचार्य परिवार द्वारा समरसता के कार्यक्रम मे भेड़ाघाट मे सहभोज का आयोजन किया गया।

जून

1.     दिनांक 15 जून 2016 को दादा वीरेन्द्रपुरी वाचनालय का उद्घाटन किया गया जिससे समाज के सभी नागरिक समाचार पत्र का वाचन कर सकें।

2.     दिनांक 21 जून 2016 को अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर योग शिक्षा का उद्घाटन किया गया जिसमें प्रातः 6 बजे से श्री सुनील प्यासी द्वारा समाज के सभी नागरिकों को प्रतिदिन योग सिखाया जाता है।

जुलाई

1.     गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर भैया@बहिन द्वारा श्रीफल देकर आचार्यों का सम्मान किया गया।

अगस्त

1.     रक्षाबंधन के पावन पर्व  पर पिछड़ी बस्ती पर जाकर आचार्यों ने रक्षाबंधन का  कार्यक्रम मनाया एवं घर-घर जाकर राखी बांधी गई व मिष्ठान वितरण किया गया।

2.     श्री कृष्ण जन्माष्ठमी में कृष्ण रूप सज्जा के अंतर्गत कृष्ण के अनेक रूपों का सजीव चित्रण किया गया जिसमें पूजन एवं आरती की गई। भैया@बहिनों ने कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर भाग लिया जिसमें उन्हे विद्यालय द्वारा पुरस्कृत किया गया।

सितंबर

1.     5 सिंतबर 2016 को विद्यालय समिति द्वारा आचार्यो का सम्मान ।

2.     त्रैमासिक परीक्षा के पूर्व सभि कक्षाओ के भैया@बहिनों की कॉपी का निरीक्षण।

अक्टूबर

1.     भैया/बहिनों के द्वारा दशहरा पर्व का आयोजन ।

2.     कक्षा सह अभिभावक गोष्टी का आयोजन।

नवंबर

1.     प्रार्थना स्थल पर मान0 प्राचार्य@प्रधानाचार्य जी द्वारा दीपावली के त्योहार का महत्व समझाते हुये कार्यक्रम की योजना।

2.     14 नवंबर 2016 को बाल दिवस के कार्यक्रम की योजना।

दिसंबर

1.     वन संचार के कार्यक्रम की योजना भैया@बहिन एवं आचार्यों की योजना।

2.     व्यंजन एवं हस्तकला की प्रदर्शिनी का आयोजन ।

जनवरी

1.     12 जनवरी 2017 को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन एवं स्वामी विवेकानंद जी की झॉकी बनाकर पथसंचलन का आयोजन।

2.     बसंत पंचमी के अवसर पर नवीन प्रवेश हेतु सरस्वती संदेश यात्रा का आयोजन एवं सरस्वती पूजन हवन व समर्पण का कार्यक्रम।

3.     26 जनवरी 2017 में मान0 प्राचार्य@प्रधानाचार्य जी द्वारा वृक्षारोपण का कार्यक्रम एवं भैया@बहिनों द्वारा विविध सांंस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।

फरवरी

1.     10 फरवरी 2017 को संत रविदास जयंती का आयोजन।

 

2.     वार्षिक परीक्षा के पूर्व सभी कक्षाओं के भैया बहिनो की कॉपी का मूल्यांकन करना एवं वार्षिक परीक्षा की तैयारी कराना।     

संस्कार केंद्र की वार्षिक कार्ययोजना  2017-18

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। साधारण भाषा में गुरु वह व्यक्ति हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा मुहूर्त

जुलाई 16, 2019 को 01:50:24 से पूर्णिमा आरम्भ
जुलाई 17, 2019 को 03:10:05 पर पूर्णिमा समाप्त

1.  गुरु पूजा और श्री व्यास पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि को सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक व्याप्त होना आवश्यक है।
2.  यदि पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तो यह पर्व पहले दिन मनाया जाता है।

गुरु पूजन विधि

1.  इस दिन प्रातःकाल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों को करके उत्तम और शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
2.  फिर व्यास जी के चित्र को सुगन्धित फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए। उन्हें ऊँचे सुसज्जित आसन पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए।
3.  इसके बाद वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर कुछ दक्षिणा यथासामर्थ्य धन के रूप में भेंट करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा महत्व

पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था; ऐसी मान्यता है।

वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। धर्म में रुचि कम होने के कारण मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बाँट दिया जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति रखने वाले लोग भी वेदों का अध्ययन करके लाभ उठा सकें।

व्यास जी ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बाँटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

वेदों में मौजूद ज्ञान अत्यंत रहस्यमयी और मुश्किल होने के कारण ही वेद व्यास जी ने पुराणों की रचना पाँचवे वेद के रूप में की, जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक किस्से-कहानियों के रूप में समझाया गया है। पुराणों का ज्ञान उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को दिया।

व्यास जी के शिष्यों ने अपनी बुद्धि बल के अनुसार उन वेदों को अनेक शाखाओं और उप-शाखाओं में बाँट दिया। महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना भी की थी। वे हमारे आदि-गुरु माने जाते हैं। गुरु पूर्णिमा का यह प्रसिद्ध त्यौहार व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

1.  इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु परिवार में जो भी बड़ा है अर्थात माता-पिता, भाई-बहन, आदि को भी गुरु तुल्य समझना चाहिए।
2.  गुरु की कृपा से ही विद्यार्थी को विद्या आती है। उसके हृद्य का अज्ञान व अन्धकार दूर होता है।
3.  गुरु का आशीर्वाद ही प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगल करने वाला होता है। संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है।
4.  गुरु से मन्त्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
5.  इस दिन गुरुजनों की यथा संभव सेवा करने का बहुत महत्व है।
6.  इसलिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक जरूर मनाना चाहिए।

हम आशा करते हैं कि यह गुरु पूर्णिमा आपके लिए अत्यन्त शुभकारी रहे। गुरु पूर्णिमा की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!