• हमारा लक्ष्य

    इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली का विकास करना जिसके द्वारा एसी युवा पीड़ी का निर्माण हो सके जो हिंदुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो,

  • image

    हमारा लक्ष्य

    शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं अध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण विकसित हो तथा जो जीवन की वर्तमान चुनोतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सके

  • image

    हमारा लक्ष्य

    और उसका जीवन ग्रामों, वनों, गिरिकन्दराओ एवं झुग्गी - झोपड़ियों में निवास करने वाले दीन-दु:खी अभावग्रस्त अपने बान्धवों को

  • image

    हमारा लक्ष्य

    सामाजिक कुरीतियों, शोषण एवं अन्याय से मुक्त कराकर राष्ट्र जीवन को समरस, सुसंपन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित हो |


विद्या भारती महाकोशल प्रांत

shishu vatika patra
त्रेमासिक परीक्षा 2018 की समय सारिणी
जिला एवं विभाग विज्ञान मेला 2018 कार्यशाला तथा प्रतियोगिता
जिला एवं विभाग बौद्धिक कार्यशाला तथा प्रतियोगिता 2018
इस एक्सेल शीट में विद्यालय की जानकारी भरकर - itcellvb@gmail.com एवं snsinha05@gmail.com पर तत्काल ईमेल.करे
इस एक्सेल शीट में पूर्व छात्र भैया बहिनों की जानकारी भरकर - itcellvb@gmail.com एवं snsinha05@gmail.com पर तत्काल ईमेल.करे
data upload sheet
khel patra2018
NCERT Book of Class6
English Spelling Game
Test
Vidyabharti, Madhya Kshetra Kshetriya Khelkud Samaroh - 2016 Amantran
EKAL KIRA PRATIYOGITA PURSKAR BITRAN SARASWATI SHISHU MANDIR HIGHER SWCONDARY SCHOOL DEORI
JANMASTMI UTSAV IN MANDLA
Chhatra Samman
Chhatra Samman
Vraksharopan guru poornima ke avsar par samppan huaa
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
COMPUTER CLASS START DATE ON 11/07/2016
data upload nirdesh
JANMASTMI PHOTO
ssm ramjhiriya suvidha
shishu vatika patra
त्रेमासिक परीक्षा 2018 की समय सारिणी
जिला एवं विभाग विज्ञान मेला 2018 कार्यशाला तथा प्रतियोगिता
जिला एवं विभाग बौद्धिक कार्यशाला तथा प्रतियोगिता 2018
इस एक्सेल शीट में विद्यालय की जानकारी भरकर - itcellvb@gmail.com एवं snsinha05@gmail.com पर तत्काल ईमेल.करे
इस एक्सेल शीट में पूर्व छात्र भैया बहिनों की जानकारी भरकर - itcellvb@gmail.com एवं snsinha05@gmail.com पर तत्काल ईमेल.करे
data upload sheet
khel patra2018
NCERT Book of Class6
English Spelling Game
Test
Vidyabharti, Madhya Kshetra Kshetriya Khelkud Samaroh - 2016 Amantran
EKAL KIRA PRATIYOGITA PURSKAR BITRAN SARASWATI SHISHU MANDIR HIGHER SWCONDARY SCHOOL DEORI
JANMASTMI UTSAV IN MANDLA
Chhatra Samman
Chhatra Samman
Vraksharopan guru poornima ke avsar par samppan huaa
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
Guru Poonima avam Chhatra Samman Samaroh 2016 date 19-07-2016
COMPUTER CLASS START DATE ON 11/07/2016
data upload nirdesh
JANMASTMI PHOTO
ssm ramjhiriya suvidha
🚩🚩"सरस्वती शिशु मंदिर काटजू नगर रतलाम में नव सृजन शिशु वाटिका उद्यान एवं नवीन कक्षा कक्षों के लिए भूमि पूजन आज दिनांक 3 दिसंबर 2025 को क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री अखिलेश मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय में जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्राप्त कर आप समाज में उच्च पदों पर पहुचेंगे । यह जिले का ही नहीं, प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय हो। यह आपके ऊपर निर्भर है। यहां शिक्षा ग्रहण कर आप अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं और परिवार व देश को भी श्रेष्ठ बनायें। 🚩🚩कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रांतीय सचिव श्री गोपाल काकानी ने कहा कि विद्या भारती में भूमि पूजन एक रस्म नहीं है, बल्कि एक संकल्प है जो कि याद दिलाता है कि आपको यह कार्य शीघ्र पूरा करना है। ⛳विशेष अतिथि -वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश चौधरी थे। ⛳सरस्वती शिशु शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सखलेचा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम प्रांत का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बनाने के लिए संकल्पित है आप पूरे मन से अच्छी शिक्षा ग्रहण करें। माता-पिता के साथ-साथ विद्यालय का व देश का नाम रोशन करें। 🚩कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र का पूजन अर्चन व दीप प्रज्वलन कर किया। अतिथि परिचय सरस्वती शिशु शिक्षा समिति के सचिव श्री शैलेंद्र सुरेका ने दिया। 🚩अतिथियों का स्वागत सरस्वती शिशु शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष श्री जवाहर चौधरी, उपाध्यक्ष श्री सुनील लाठी,सहसचिव श्री विनोद मूणत, श्री अशोक जैन, कोषाध्यक्ष श्री मनीष सोनी, श्रीमती संतोष काकानी, श्री मणिभद्र कटारिया व प्राचार्या श्रीमती वत्सला रूनवाल ने किया। ⛳इस अवसर पर सह प्रांत प्रमुख श्री सुंदरलाल शर्मा, विभाग समन्वयक श्री राकेश जोशी, श्री गोविंद अग्रवाल, श्री राकेश नेमानी व श्री सुरेंद्र मित्तल उपस्थित थे। 🚩अतिथियों को स्मृति चिन्ह सचिव श्री शैलेंद्र सुरेका, श्री सुभाष चत्तर, श्री रामेश्वर पाटीदार व श्रीमती संतोष काकानी ने दिया। 🚩कार्यक्रम के अंत में आभार समिति के उपाध्यक्ष श्री सुनील लाठी ने प्रेषित किया। 🚩संचालन श्रीमती दीप्ति त्रिवेदी दीदी ने किया।

संगठन

कार्य विस्तार

विद्या भारती महाकोशल प्रांत

हमें जाने

बार्षिक कार्यक्रम

मध्य प्रदेश में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर योजना का शुभारंभ १२ फरवरी (बसंत पंचमी) सन 1951 में रीवा नगर से विद्या भारती मध्य क्षेत्र के मार्गदर्शक माननीय रोशन लाल जी सक्सेना द्वारा किया गया । इनके अथक परिश्रम एवं कुशल नेतृत्व में संपूर्ण मध्य प्रदेश (मध्य प्रदेश एवं छतीसगढ़) में विद्यालयों की संख्या दिनों - दिन बढ़ती गई । मध्य प्रदेश (महाकोशल प्रान्त) में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर योजना को 58 वर्ष पूर्ण हो गये हैं । जिसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में सरस्वती शिक्षा परिषद, ग्रामीण क्षेत्र में केसव शिक्षा समिति, वनवासी एवं उपेक्षित क्षेत्र में महाकोशल वनांचल शिक्षा सेवा न्यास द्वारा विद्यालयों का मार्गदर्शन किया जाता है ।

aba6214e-3d16-4e.png

विद्यालय की बहनों की सेपर टकरा व बॉल टेनिस में अखिलभारतीय प्रतियोगिता जीतकर एसजीएफआई स्तर में सहभागी रहीं |

किसी भी देश की शिक्षा तब परिणामकारी होती है जब शिक्षा का स्वरूप उस देश के जीवन दर्शन पर आधारित होता है ; अर्थात देश का जैसा जीवनदर्शन वैसा ही शिक्षादर्शन होता है | इसलिए शिक्षा पद्धति भी उस देश के मनोविज्ञान पर आधारित होना चाहिए जिससे देश के विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण उस देश के अनुरूप हो सकेगा |

हमारे विद्यालय का मूल उद्देश्य भी भारतीय जीवनदर्शन-आधारित हिंदुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत शिक्षा प्रणाली का विकास करना है| हमारे विद्यालय के माध्यम से वर्तमान शिक्षा को भारतीय स्वरूप देने का प्रमुख कार्य किया जा रहा है |

वर्तमान भौतिक वादी युग में बलिकाओं के सर्वांगीण विकास (शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं अध्यात्मिक) की बहुत आवश्कता है | आज बालिकाएं शिक्षा प्राप्त करने के साथ - साथ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है | उनके भावी जीवन को सजाने - संवारने के लिए उन्हें योग्य वातावरण एवं सुनहरे अवसर प्रदान करने के लिए सरस्वती शिक्षा परिषद् द्वारा संचालित बालिका आवासीय विद्यालय नरसिंह मंदिर जबलपुर में संचालित है |

97587692-a458-45.jpg

सरस्वती शिशु मंदिर का उद्देश्य एक शब्द में निहित है - समग्र विकास | बालक के चरित्र का निर्माण विद्यालय में ही होता है, यहीं उसमें बीज डाले जाते है | ये बीज में भविष्य में भारत के निर्माण की संभावनाएँ लिए होते है , भले ही ठोस रूप से कुछ भी न दिखाई दे परंतु बालक का समग्र विकास करना चाहिए | इसी दृष्टि से उद्देश्य को एक शब्द में निरुपित किया गया है |

समग्र विकास के दो आयाम है :

1.पंचकोशात्मक व्यक्ति विकास अर्थात शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक विकास |

2. व्यक्ति से परमेष्टि तक का विकास अर्थात व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, विश्व, सृष्टि एवं परमष्टि के संदर्भ में विकास |

षष्ठ के अष्ठम - सफेद सलवार, आसमानी कुर्ता, सफ़ेद चुन्नी, लाल स्वेटर, लाल रिबिन, काले जूते, सफ़ेद मोज़े, बेल्ट लाल - नीली पट्टी

नवम से द्वादश - सफ़ेद सलवार, स्टील ग्रे कुर्ता, सफ़ेद चुन्नी, नीला स्वेटर/ब्लेजर, सफ़ेद रिबिन, काले जूते, सफ़ेद मोज़े , बेल्ट ग्रे व्हाइट पट्टी |

 

गुरुवार - सफ़ेद सलवार - कुर्ती व सफ़ेद दुपट्टा |

सामान्य वेश - रंगीन सलवार - कुर्ती

योग वेश - ग्रे कलर का लोवर एवं क्रीम कलर की टी शर्ट|

 

शारीरिक वेश - नीले रंग का ट्रेक सूट एवं सफ़ेद पी. टी. शू |

1.   कक्षा 6 से 8 तक प्रवेश साक्षात्कार द्वारा |

2.   कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश परीक्षा द्वारा |

3.   प्रवेश आवेदन पत्र 500/- नगद अथवा ड्राफ्ट जमाकर कार्यालय समय में प्राप्त किया जा सकता है |

4.   साक्षात्कार के समय प्रवेश आवेदन पत्र पूर्ण रूप से भरकर प्रस्तुत करना |

5.   छात्रावास में प्रवेश हेतु प्रवेश पत्र में अंकित तिथि पर विद्यालय में उपस्थित होना |

 

6.   प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने पर आवश्यक प्रमाणपत्र के साथ प्रथम अंश की राशि, संचयिकी राशि, पासपोर्ट साइज़ के पांच फोटो एवं स्थानान्तरण प्रमाणपत्र, अंकसूची की छाया प्रति जिला शिक्षा अधिकारी से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर कर एक सप्ताह के अन्दर कार्यालय में जमा करना | 

सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में बहुत तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं | हमारा प्रयास यही है कि हम अपने छात्र - छात्राओं को शिक्षा क्षेत्र में उपलब्ध नवीनतम तकनीक, सामग्री एवं सुविधाएँ प्रदान करें | शिक्षण हेतु विद्यालय में निरंतर शिक्षण शोध कार्यशालाएं संचालित रहती है। विद्यालय के सभी शिक्षक कम्प्यूटर शिक्षण गतिविधि आधारित शिक्षण ,एवं क्रिया आधारित शिक्षण में प्रशिक्षित है। संस्था में क्रीड़ा उद्यान , साइंस पार्क , 15 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगशाला , मल्टीमीडिया एजुकेशन सिस्टम ,गणित ,भौतिकी , रसायनशास्त्र , जीवविज्ञान की विषयवार पृथक पृथक प्रयोगशालाएं हैं । शिशु कक्षाओं के उत्तम शिक्षण हेतु उनके कक्षा कक्ष में ही शिशु वाटिका एवं प्रयोगशाला स्थापित की गई है। हमारे छात्र - छात्राओं के लिए उपलब्ध सुविधाएँ निम्न सम्मिलित हैं |

बस

विद्यालय के पास 1 बस का बेड़ा है | जिन्हें आवश्यकतानुसार बढ़ाया भी जा सकता है | बस सुविधा शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए उपलब्ध है |

पुस्तकालय

हमारे पास एक विशाल और सुसज्जित पुस्तकालय है | जो एक लंबे समय से छात्र - छात्राओं के लिए ज्ञान निर्माण के साथ ही साथ शिक्षण स्टाफ के लिए एक संसाधन के रूप में भी कार्य करता है | हमारा मानना है कि अच्छी किताबें मनुष्य के आत्म विकास के लिए अति आवश्यक हैं | इसलिए हमारे पुस्तकालय में अच्छी पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों इत्यादि का संग्रह है | जो सदैव ही छात्र – छात्राओं, शिक्षण स्टाफ एवं कर्मचारियों के लिए उपलब्ध रहतीं हैं |

क्रीड़ास्थल

विद्यालय का अपना सुसज्जित क्रीड़ास्थल/खेल का मैदान है | साथ ही साथ इन्डोर गेम्स के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध हैं |

प्रयोगशालायें

विद्यालय के पास छात्र – छात्राओं की प्रतिभा, कौशल विकास और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देने और अच्छी तरह से सीखने के लिए पूर्णतः सुसज्जित जीव-विज्ञान, भौतिकी, रसायन-विज्ञान, भूगोल और कम्प्यूटर साइंस विषयों के लिए आधुनिक प्रयोगशालायें उपलब्ध हैं |कंप्यूटर का अनिवार्य प्रशिक्षण छात्रों को दिया जाता है | ताकि कोई छात्र कभी भी इस कंप्यूटर युग में अपने आप को असहज एवं पिछड़ा महसूस न करे | कंप्यूटर लैब में अंग्रेजी, गणित, योगा, शारीरिक शिक्षा, विज्ञान जैसे विषयों इत्यादि पर ऑडियो/वीडियो सीडी पर दृश्य सामग्री उपलब्ध हैं | विद्यालय के पास 60 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगशाला और मल्टीमीडिया एजुकेशन सिस्टम है, कम्प्यूटर प्रयोगशाला में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है |

छात्र दैनान्दिनी

छात्र दैनान्दिनी पुस्तिका वह माध्यम है जिसके द्वारा माता पिता और शिक्षकों को एक दूसरे के साथ संपर्क में रहते हैं | यह माध्यम है जिसके द्वारा माता पिता को विद्यालय के नियमों, विद्यालय की गतिविधियों आदि की सूचनाएँ प्राप्त होती हैं | माता पिता / अभिभावक अपने बच्चों को दिन पर दिन प्रगति के संपर्क में रहते हैं |

अतिरिक्त कक्षाएं

विद्यालय द्वारा समय-समय पर आवश्यकतानुसार विभिन्न विषयों हेतु अतिरिक्त कक्षाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं |

गतिविधियाँ

सभी बच्चों के समग्र विकास के लिए, केवल पुस्तकों का अध्ययन ही पर्याप्त नहीं है | एक बच्चा एक निष्क्रिय बीज के समान होता है | यदि बीज को अनुकूल परिस्थितियाँ मिलेंगी तभी वह विकसित होगा और एक बड़ा पेड़ बनेगा | हमारे विद्यालय छात्र - छात्राओं सर्वांगीण विकास के लिए उनके के लिए अनुकूल परिस्थितियों प्रदान करता है | विद्यालय हर बच्चे एक मंच की तरह है जहां वह शिक्षकों से दिशा निर्देश प्राप्त करतें हैं |

सह पाठयक्रम गतिविधियाँ

सह पाठयक्रम गतिविधियाँ मन की विभिन्न विकास के लिए आवश्यक हैं | विद्यालय शिक्षाविदों के साथ सह पाठयक्रम को एकीकृत कर हमारे विद्यार्थियों के लिए सबसे सुखद के शिक्षण गतिविधियाँ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है | सह पाठयक्रम गतिविधियाँ नियमित रूप से हमारे विद्यालय द्वारा आयोजित की जाती हैं | जिसमें संगीत (मुखर और वाद्य) , नाटक, वाद - विवाद , तात्कालिक वाद - विवाद , कला एवं शिल्प, नृत्य, ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, बागवानी,प्रिंटिंग, अंग्रेजी , व्यतित्व विकास एवं सुलेख इत्यादि सम्मिलित हैं | हम यह सुनिश्चित करतें हैं की प्रत्येक बच्चे को अवसर मिले ताकि शिक्षकों सक्षम एवं उनकी देखरेख छात्र - छात्राओं का समग्र विकास हो |

खेल

खेल में छात्र - छात्राओं भागीदारी से न केवल उनकी शारीरिक विकास के लिए उत्तम है बल्कि टीम भावना को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है | इसलिए विद्यालय विभिन्न आयु समूहों के लिए विभिन्न खेलों को बढ़ावा देकर प्रत्येक बच्चे के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है | खेल के लिए विद्यालय क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केट बॉल, खो-खो, कबड्डी इत्यादि के लिए सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. साथ ही साथ इन्डोर गेम्स के लिए टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शतरंज, कैरम इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध करा हैं |

भवन

छात्रावास में बड़े आवासीय कक्ष है इनमे बहिनों के रहने की पूर्ण व्यवस्था | कमरे खुले,प्रकाश एवं हवादार ,स्वच्छ व् सुसज्जित है.

उधान

परिसर को पुष्पीय पौधों एवं गमलों एवं वानस्पतिक उधान से सुसज्जित किया गया है.

भोजन

बहिनों को पूर्णतः शाकाहारी ताजा भोजन दिया जाता है ,जो बहिनों को रूचि के अनुकूल होने के साथ साथ पोष्टिक आहार के सभी मापदंडों को पूर्ण करता है,

चिकित्सा

छात्रावास में रहने वाली बहनों को प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की गई है ,योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती है| वर्ष में २ बार चिकित्सकीय परिक्षण महिला चिकित्सक द्वारा कराया जाता है |

खेल परिसर

छात्रावास में बहनों के लिए खेल संसाधनों से युक्त सुसज्जित खेल परिसर है|

देश दर्शन एवं भ्रमण

छात्रावास की बहनों को वर्ष में एक बार देश दर्शन एवं भ्रमण की योजना रहती है जिसका व्यय अभिभावक को अलग से वहन करना होता है |

आचार्य एवं पालक गोष्ठी

 

बहनों की सर्वांगीण विकास एवं व्यवस्था की दृष्टी से समय समय पर आचार्य एवं पालक गोष्ठी का आयोजन किया जाता है |

१ जबलपुर शहर के हृदय स्थल (मध्य) में स्थित श्री संतो एवं श्रेष्ठ गुरुजनों के सानिध्य में शिक्षा प्रदान करने का स्थल

२ नन्हे मुन्ने भैया /बहनों के सर्वांगीण विकास हेतु सुसंस्कारित शिक्षा

३ आकर्षक शिशु वाटिका द्वारा नन्हे मुन्ने भैया /बहनों के लिए खेल खेल में शिक्षण की व्यवस्था

४ भैया /बहनों के विद्यालय आने –जाने के लिए वाहन की उत्तम व्यवस्था

५ स्पोकन इंग्लिश की अलग से कक्षा

६ सुयोग्य एवं संस्कारित आचार्यों द्वारा प्रभावी शिक्षण

७ भैया /बहनों के लिए उत्तम सुविधायुक्त खेल परिसर

८ छात्रों के बौद्धिक व् शारीरिक विकास के लिए विद्यालय स्तर के अखिल भारतीय स्तर तक प्रतियोगिताएं

९  योग,संगीत ,घोष,वैदिक गणित ,नैतिक शिक्षा आदि शिक्षण की व्यवस्था

१० कक्षा ४ से १२ वीं तक कंप्यूटर शिक्षण की उचित व्यवस्था

११ समृद्ध पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला की व्यवस्था

१२ SGFI (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया )में विद्यालय की गत तीन वर्षों (२०१४) से प्रतिभागिता

१३ कक्षा ६ से १२ वीं तक मेधावी छात्रों के लिए विशेष प्रांतीय मेधावी परीक्षा व् प्रांतीय अलंकरण की व्यवस्था

१४ स्मार्ट क्लास एवं प्रोजेक्टर द्वारा प्रभावी शिक्षण व्यवस्था

१५ कक्षा १ से १२ वीं तक राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न छात्रवृतियो की सुविधा

१६ अनिवार्य शिक्षा के अंतर्गत के.जी.में २५% निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था

१७ बहिनों के लिए सुरक्षित परिसर की व्यवस्था

 

१८ कक्षा १२ वीं में ८५% से ऊपर मेधावी छात्राओं को मुख्यमंत्री द्वारा २५०००/- प्रदत्त | 

माधव शिक्षा समिति रमझिरिया विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों हेतु निम्न दो प्रकार की योजनाओं को रेखांकित करती है :-

परिषद द्वारा अनुशंसित योजनाएं

सरस्वती शिक्षा परिषद द्वारा अनुशंसित कर्मचारी कल्याण की सभी योजनाएं रमझिरिया विद्यालय में प्रारंभ से ही लागू हैं - 
1. कर्मचारी भविष्य निधि योजना - कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सागर के नियमानुसार 
2. कर्मचारी परिवार पेंशन योजना - कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सागर के नियमानुसार 
3. कर्मचारी समूह बीमा योजना - भारतीय जीवन बीमा निगम जबलपुर एवं सरस्वती शिक्षा परिषद् जबलपुर के नियमानुसार 
4. ग्रुप ग्रेच्युटी बीमा स्कीम - भारतीय जीवन बीमा निगम जबलपुर एवं सरस्वती शिक्षा परिषद् जबलपुर के नियमानुसार 
5 अर्जित अवकाश-नगदीकरण - सरस्वती शिक्षा परिषद जबलपुर के नियमानुसार 
6. प्राचार्य,प्रधानाचार्य आवास भत्ता - सरस्वती शिक्षा परिषद जबलपुर के नियमानुसार 

विद्यालय द्वारा अनुशंसित योजनाएं

माधव शिक्षा समिति , संचालक सरस्वती शिशु मंदिर रमझिरिया ,सागर की समिति स्वेच्छा से इस विद्यालय के मूल कर्मचारियों के कल्याण की दृष्टि से नई-नई योजनाएं बनाकर उन्हे लागू करना चाहती है .यहां पर रेखांकित की गई योजनाओं की समीक्षा 10 वर्ष में अथवा आवश्यकतानुसार उसके पूर्व की जावे जिससे कल्याण की योजनाओं का अधिकतम लाभ कार्यरत कर्मचारियों को मिल सके . माधव शिक्षा समिति के सदस्यों, पदाधिकारियों तथा अन्य अधिकारियों एवं उनके घर के बच्चों को इन योजनाओं का लाभ कभी नहीं दिया जावेगा |

कर्मचारी कल्याण की योजनाओं का उद्देश्य

कर्मचारी कल्याण की योजनाओं का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना है .जिससे उनमें कर्तव्यनिष्ठा , गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा संस्था के प्रति समर्पण भाव में विस्तार होगा .

सामान्य नियम

1. अधोलिखित योजनाओं का लाभ केवल विद्यालय में कार्यरत नियमित कर्मचारियों को ही प्राप्त होगा .
2. विद्यालय की आर्थिक स्थिति अनुरूप न होने की स्थिति में इन योजनाओं को स्थगित भी किया जा सकेगा.
3. किसी कर्मचारी के शिक्षकीय कार्य एवं समर्पण भाव में कमी ,अथवा कार्य - व्यवहार संतोषजनक न पाये जाने पर समिति उस कर्मचारी को विद्यालय द्वारा लागू की गई सभी या कुछ योजनाओं के लाभ से वंचित करेगी .
4. विद्यालय में स्थानांतरित कर्मचारियों के दो वर्ष के निरीक्षण काल के उपरांत ही उन्हे किन योजनाओं का लाभ दिया जावे इस पर समिति अलग से निर्णय लेगी .
5. समस्त विशेष योजनाओं, ऋणयोजनाओं तथा कुछ अन्य योजनाओं का लाभ विद्यालय के उन सभी पूर्व कर्मचारियों को इस विद्यालय मे स्थानांतरण पर देय नहीं होगा (a) जिनके इस विद्यालय से स्थानांतरण संस्था हित में किए गए थे ,तथा (b) जिनका पूर्व में इस विद्यालय में प्रशिक्षु आचार्य के रूप में नियमितिकरण नहीं हो पाया था.
विद्यालय में कर्मचारी कल्याण की निम्न तीन प्रकार की योजनाएं होंगी 
(अ) सामान्य योजनाएं 
(ब) विशेष योजनाएं
(स) ऋण योजनाएं 

(अ) सामान्य योजनाएं

इन योजनाओं का लाभ इस विद्यालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों को समान रूप से बिना किसी भेदभाव (वरिष्ठता आदि) के दिया जावेगा , जब तक की नियमों में अन्यथा न दिया गया हो | 
1. वेश आदि कर्मचारियों को वर्ष में दो बार क्रमशः गुरुपूर्णिमा उत्सव पर एवं गोलवलकर जयंती कार्यक्रम पर वेश दिए जावेंगे . यदि किसी कारण कार्यक्रम नहीं मनाये जाते है , तब वेश देय नहीं होगा अन्य ऋतु परिवर्तन पर विद्यालय का कार्य बाधित न हो इस हेतु कर्मचारियों को ठंड में इनर, स्वेटर, मफलर ,विद्यालय कक्ष के लिए जूते - मोजे आदि तथा वर्षा ऋतु में छाता, रेनकोट इत्यादि दिए जावेंगे | 
2.अवकाश इस बाबत परिषद द्वारा अनुमोदित सामान्य नियम लागू होंगे. अवकाश कर्मचारी को दी गई एक सुविधा है,न कि उनका अधिकार .अतः उन्हें अत्यावश्यक होने पर तथा पूर्व स्वीकृति पर ही मान्य किया जावेगा 
3. परिवार कल्याण योजनाएं कर्मचारी की संस्था के प्रति निष्ठा एवं समर्पण भाव में परोक्षरूप से उनके परिवार का भी बड़ा सहयोग होता हैं ,यह सर्वमान्य तथ्य है . इसे ध्यान में रखकर निम्न पांच योजनाओं को अंगीकार किया जाता है :- 
(क) छात्रवृत्ति : कर्मचारियों के बच्चों को अध्ययन एवं स्वाध्याय के प्रति अभिरुचि उत्पन्न हो इस हेतु उन सभी शालेय कक्षाओं (कक्षा अरुण से द्वादश तक के बच्चों को वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर प्राप्तांकों के आधार पर प्रतिवर्ष छात्रवृति दी जावेगी, जिससे उनकी अभिरुचि पठन - पाठन में बढ़ सके. कर्मचारियों के बच्चों को प्रोत्साहित करना ही छात्रवृत्ति का वास्तविक लक्ष्य है. छात्रवृत्ति योजना वार्षिक परीक्षा परिणाम 2011 से मान्य की जाती है .छात्रवृत्ति (की राशि शालेय शिक्षा शैक्षणिक स्तर पूर्व प्राथमिक , प्राथमिक , माध्यमिक , हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी के प्राप्तांको के आधार पर तालिका के अनुसार होगी | 

शैक्षणिक स्तर 80% या अधिक 60% या अधिक 45% या अधिक 45% से कम
हायर सेकेण्डरी कक्षा 11 एवं 12 4,000/- 3,000/- 2,000/- 1,000/-
हाईस्कूल कक्षा 9 एवं 10 3000/- 2,000/- 1,000/- 5,00/-
माध्यमिक कक्षा 6, 7 एवं 8 2,000/- 1,500/- 1,000/- 5,00/-
प्राथमिक कक्षा 3, 4 एवं 5 1,500/- 1,00/- 7,50/- 500/-
प्राथमिक कक्षा 3, 4 एवं 5 1,500/- 1,00/- 7,50/- 500/-

विद्यालय का इतिहास

  • 1978 में गढ़ा शिक्षा समिति के माध्यम से गंगानगर गढ़ा में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की गई
  • 12.12.1979 को विद्यालय की स्थापना हुई जिसका पंजीयन क्र.8578 है |
  • 1978 में मात्र 20 भैया बहिनों को लेकर गंगानगर गढ़ा के क्लब के भवन में शिशु मंदिर का बीजारोपण किया गया जो आज विशाल वटवृक्ष के रुप में आपके सामने है |
  • 1981-82 में भवन निर्माण हेतु 4 कक्षों की नींव रखी गई जो वर्तमान में 38 कक्ष एवं 1 हॉल का आकर्षण रुप ले चुका है |
  • सफलता से उत्साहित होकर प्राथमिक शाला को 1985 में पूर्व माध्यमिक शाला, 1988 में माध्यमिक शाला और 1990 में उच्चतर माध्यमिक शाला के रुप में विकसित किया गया |
  • गढ़ा शिक्षा समिति केवल गंगानगर तक सीमित नही रही अपितु 1984 में बरगी हिल्स में प्राथमिक शाला की स्थापना की गई जो अब माध्यमिक शाला के रुप में कार्यरत है
  • विस्तार योजना जारी रखते हुऐ 1990 में आदर्श नगर ग्वारीघाट एवं पावरग्रिड सूखा पाटन रोड में प्राथमिक शालाऐं प्रारम्भ की गई |

अप्रेल

1.     सुंदरकांड का पाठ एवं हवन पूजन के साथ विद्यालय प्रांरभ  हुआ प्रतिदिन 5 अभिभावकों को प्रार्थना स्थल पर सरस्वती पूजन करानें हेतु आमंत्रित किया जाता है।

मई

1.     समिति एवं समस्त आचार्य परिवार द्वारा समरसता के कार्यक्रम मे भेड़ाघाट मे सहभोज का आयोजन किया गया।

जून

1.     दिनांक 15 जून 2016 को दादा वीरेन्द्रपुरी वाचनालय का उद्घाटन किया गया जिससे समाज के सभी नागरिक समाचार पत्र का वाचन कर सकें।

2.     दिनांक 21 जून 2016 को अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर योग शिक्षा का उद्घाटन किया गया जिसमें प्रातः 6 बजे से श्री सुनील प्यासी द्वारा समाज के सभी नागरिकों को प्रतिदिन योग सिखाया जाता है।

जुलाई

1.     गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर भैया@बहिन द्वारा श्रीफल देकर आचार्यों का सम्मान किया गया।

अगस्त

1.     रक्षाबंधन के पावन पर्व  पर पिछड़ी बस्ती पर जाकर आचार्यों ने रक्षाबंधन का  कार्यक्रम मनाया एवं घर-घर जाकर राखी बांधी गई व मिष्ठान वितरण किया गया।

2.     श्री कृष्ण जन्माष्ठमी में कृष्ण रूप सज्जा के अंतर्गत कृष्ण के अनेक रूपों का सजीव चित्रण किया गया जिसमें पूजन एवं आरती की गई। भैया@बहिनों ने कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर भाग लिया जिसमें उन्हे विद्यालय द्वारा पुरस्कृत किया गया।

सितंबर

1.     5 सिंतबर 2016 को विद्यालय समिति द्वारा आचार्यो का सम्मान ।

2.     त्रैमासिक परीक्षा के पूर्व सभि कक्षाओ के भैया@बहिनों की कॉपी का निरीक्षण।

अक्टूबर

1.     भैया/बहिनों के द्वारा दशहरा पर्व का आयोजन ।

2.     कक्षा सह अभिभावक गोष्टी का आयोजन।

नवंबर

1.     प्रार्थना स्थल पर मान0 प्राचार्य@प्रधानाचार्य जी द्वारा दीपावली के त्योहार का महत्व समझाते हुये कार्यक्रम की योजना।

2.     14 नवंबर 2016 को बाल दिवस के कार्यक्रम की योजना।

दिसंबर

1.     वन संचार के कार्यक्रम की योजना भैया@बहिन एवं आचार्यों की योजना।

2.     व्यंजन एवं हस्तकला की प्रदर्शिनी का आयोजन ।

जनवरी

1.     12 जनवरी 2017 को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन एवं स्वामी विवेकानंद जी की झॉकी बनाकर पथसंचलन का आयोजन।

2.     बसंत पंचमी के अवसर पर नवीन प्रवेश हेतु सरस्वती संदेश यात्रा का आयोजन एवं सरस्वती पूजन हवन व समर्पण का कार्यक्रम।

3.     26 जनवरी 2017 में मान0 प्राचार्य@प्रधानाचार्य जी द्वारा वृक्षारोपण का कार्यक्रम एवं भैया@बहिनों द्वारा विविध सांंस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।

फरवरी

1.     10 फरवरी 2017 को संत रविदास जयंती का आयोजन।

 

2.     वार्षिक परीक्षा के पूर्व सभी कक्षाओं के भैया बहिनो की कॉपी का मूल्यांकन करना एवं वार्षिक परीक्षा की तैयारी कराना।     

विद्याभारती महाकोशल प्रांत में दिनाक 25/०३/२०१७ से 30/०३/२०१७ तक व्यक्तित्व विकास वर्ग आयोजित है |

आज जयपुर में समरसता संगम में सम्मलित होने का सौभाग्य मिला यह संगम १४;१५;१६अक्टू. तक चलेगाआज कार्य क्रम मुख्य अथिति मा.थावलचन्र्द जी गहलोत सा.न्याय मंत्री मा.सुहास राव हिरेमठ आ.भा.सेवा प्रमुख आन्यान संत महात्मा सम्मलित हुऐ|

रानी दुर्गावती छात्रावास रायसेन में वार्षिक उत्सव महानाटय विष्णुदशावतार का मंचन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रायसेन जिले की कलेक्टर उपस्थित रही। 


93cfa476-c3cd-4c.jpg

विद्या भारती मध्यभारत प्रान्त के पूर्णकालिक कार्यकर्ता एवं शारदा प्रकाशन के निदेशक डॉ भागीरथ जी कुमरावत जी ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के उपाध्यक्ष पद पर पदभार ग्रहण किया।
हार्दिक बधाई।

88306e36-d701-4b.jpg

सरस्वती विद्या मन्दिर भरतगढ दतिया के मेधावी छात्र आलोक रावत का चयन National inspired award scheme में प्रदेश स्तर पर चयन हुआ ! वे राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे !

d59a2eb9-3278-4a.jpg />
                                    </td>
		</tr><tr>
			<td>
                                       <div dir="ltr">प्रांतीय प्रधानाचार्य अभ्यर्थी वर्ग भोपाल में सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान में 28 अप्रैल की प्रातः से प्रारम्भ हुआ। वर्ग में 46 प्रतिभागी उपस्थित है। वर्ग सयोजक ज्ञानसिंग जी कौरव है।</div>
<div></div><img src =

62 वे SGFI रोप स्किपिंग प्रतियोगिता का उद्धघाटन अवसर पर माननीय जयभान जी माननीय श्रीरामजी अवं अन्य महानुभाओ का मार्गदंशन मिला ।

 

     राजा उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो भार्याएं थीं । राजा उत्तानपाद के सुनीतिसे ध्रुव तथा सुरुचिसे उत्तम नामक पुत्र हुए । यद्यपि सुनीति बडी रानी थी किंतु राजा उत्तानपादका प्रेम सुरुचिके प्रति अधिक था । एक बार राजा उत्तानपाद ध्रुवको गोद में लिए बैठे थे कि तभी छोटी रानी सुरुचि वहां आई । अपने सौतके पुत्र ध्रुवको राजाकी गोदमें बैठे देख कर वह ईष्र्या से जल उठी । झपटकर उसने ध्रुवको राजाकी गोदसे खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उनकी गोदमें बिठाते हुए कहा, 'रे मूर्ख! राजाकी गोदमें वही बालक बैठ सकता है जो मेरी कोखसे उत्पन्न हुआ है । तू मेरी कोखसे उत्पन्न नहीं हुआ है इस कारणसे तुझे इनकी गोदमें तथा राजसिंहासनपर बैठनेका अधिकार नहीं है । यदि तेरी इच्छा राज सिंहासन प्राप्त करनेकी है तो भगवान नारायणका भजन कर । उनकी कृपासे जब तू मेरे गर्भसे उत्पन्न होगा तभी राजपद को प्राप्त कर सकेगा ।
23 मार्च अमर शहीद हेमू कालाणी का जन्मदिवस है, एक ऐसा क्रांतिकारी जिसका नाम भी हम में से कइयों ने संभवतः नहीं सुना होगा और जो आज भी इतिहास की किताबों में उपेक्षित है। 23 मार्च 1923 को वर्तमान पाकिस्तान के सिंध में सुक्कर में पेशूमल कालाणी एवं जेठी बाई के घर जन्मे राही हेमन यानी हेमू कालाणी बचपन से ही स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का प्रचार करने लगे थे पर जल्दी ही वे क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो गए और अंग्रेजी सरकार से सम्बंधित वाहनों पर कई बम हमलों में शामिल रहे|
e3a4a216-7304-48.pdf

सुविधाएं

सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में बहुत तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं | हमारा प्रयास यही है कि हम अपने छात्र - छात्राओं को शिक्षा क्षेत्र में उपलब्ध नवीनतम तकनीक, सामग्री एवं सुविधाएँ प्रदान करें | शिक्षण हेतु विद्यालय में निरंतर शिक्षण शोध कार्यशालाएं संचालित रहती है। विद्यालय के सभी शिक्षक कम्प्यूटर शिक्षण गतिविधि आधारित शिक्षण ,एवं क्रिया आधारित शिक्षण में प्रशिक्षित है। संस्था में क्रीड़ा उद्यान , साइंस पार्क , 60 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगशाला , मल्टीमीडिया एजुकेशन सिस्टम ,गणित ,भौतिकी , रसायनशास्त्र , जीवविज्ञान की विषयवार पृथक पृथक प्रयोगशालाएं हैं । शिशु कक्षाओं के उत्तम शिक्षण हेतु उनके कक्षा कक्ष में ही शिशु वाटिका एवं प्रयोगशाला स्थापित की गई है। हमारे छात्र - छात्राओं के लिए उपलब्ध सुविधाएँ निम्न सम्मिलित हैं |

 

विद्यालय के पास 4 बसों का बेड़ा है | जिन्हें आवश्यकतानुसार बढ़ाया भी जा सकता है | बस सुविधा शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए उपलब्ध है |

हमारे पास एक विशाल और सुसज्जित पुस्तकालय है | जो एक लंबे समय से छात्र - छात्राओं के लिए ज्ञान निर्माण के साथ ही साथ शिक्षण स्टाफ के लिए एक संसाधन के रूप में भी कार्य करता है | हमारा मानना है कि अच्छी किताबें मनुष्य के आत्म विकास के लिए अति आवश्यक हैं | इसलिए हमारे पुस्तकालय में अच्छी पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों इत्यादि का संग्रह है | जो सदैव ही छात्र – छात्राओं, शिक्षण स्टाफ एवं कर्मचारियों के लिए उपलब्ध रहतीं हैं |

 

विद्यालय का अपना सुसज्जित क्रीड़ास्थल/खेल का मैदान है | साथ ही साथ इन्डोर गेम्स के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध हैं |

 

विद्यालय के पास छात्र – छात्राओं की प्रतिभा, कौशल विकास और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देने और अच्छी तरह से सीखने के लिए पूर्णतः सुसज्जित जीव-विज्ञान, भौतिकी, रसायन-विज्ञान, भूगोल और कम्प्यूटर साइंस विषयों के लिए आधुनिक प्रयोगशालायें उपलब्ध हैं |कंप्यूटर का अनिवार्य प्रशिक्षण छात्रों को दिया जाता है | ताकि कोई छात्र कभी भी इस कंप्यूटर युग में अपने आप को असहज एवं पिछड़ा महसूस न करे | कंप्यूटर लैब में अंग्रेजी, गणित, योगा, शारीरिक शिक्षा, विज्ञान जैसे विषयों इत्यादि पर ऑडियो/वीडियो सीडी पर दृश्य सामग्री उपलब्ध हैं | विद्यालय के पास 60 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगशाला और मल्टीमीडिया एजुकेशन सिस्टम है, कम्प्यूटर प्रयोगशाला में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है |

 

छात्र दैनान्दिनी पुस्तिका वह माध्यम है जिसके द्वारा माता पिता और शिक्षकों को एक दूसरे के साथ संपर्क में रहते हैं | यह माध्यम है जिसके द्वारा माता पिता को विद्यालय के नियमों, विद्यालय की गतिविधियों आदि की सूचनाएँ प्राप्त होती हैं | माता पिता / अभिभावक अपने बच्चों को दिन पर दिन प्रगति के संपर्क में रहते हैं | 

विद्यालय द्वारा समय-समय पर आवश्यकतानुसार विभिन्न विषयों हेतु अतिरिक्त कक्षाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं |

सभी बच्चों के समग्र विकास के लिए, केवल पुस्तकों का अध्ययन ही पर्याप्त नहीं है | एक बच्चा एक निष्क्रिय बीज के समान होता है | यदि बीज को अनुकूल परिस्थितियाँ मिलेंगी तभी वह विकसित होगा और एक बड़ा पेड़ बनेगा | हमारे विद्यालय छात्र - छात्राओं सर्वांगीण विकास के लिए उनके के लिए अनुकूल परिस्थितियों प्रदान करता है | विद्यालय हर बच्चे एक मंच की तरह है जहां वह शिक्षकों से दिशा निर्देश प्राप्त करतें हैं |

सह पाठयक्रम गतिविधियाँ मन की विभिन्न विकास के लिए आवश्यक हैं | विद्यालय शिक्षाविदों के साथ सह पाठयक्रम को एकीकृत कर हमारे विद्यार्थियों के लिए सबसे सुखद के शिक्षण गतिविधियाँ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है | सह पाठयक्रम गतिविधियाँ नियमित रूप से हमारे विद्यालय द्वारा आयोजित की जाती हैं | जिसमें संगीत (मुखर और वाद्य) , नाटक, वाद - विवाद , तात्कालिक वाद - विवाद , कला एवं शिल्प, नृत्य, ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, बागवानी,प्रिंटिंग, अंग्रेजी , व्यतित्व विकास एवं सुलेख इत्यादि सम्मिलित हैं | हम यह सुनिश्चित करतें हैं की प्रत्येक बच्चे को अवसर मिले ताकि शिक्षकों सक्षम एवं उनकी देखरेख छात्र - छात्राओं का समग्र विकास हो |

खेल में छात्र - छात्राओं भागीदारी से न केवल उनकी शारीरिक विकास के लिए उत्तम है बल्कि टीम भावना को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है | इसलिए विद्यालय विभिन्न आयु समूहों के लिए विभिन्न खेलों को बढ़ावा देकर प्रत्येक बच्चे के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है | खेल के लिए विद्यालय क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केट बॉल, खो-खो, कबड्डी इत्यादि के लिए सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. साथ ही साथ इन्डोर गेम्स के लिए टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शतरंज, कैरम इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध करा हैं|

स्वाधीनता प्राप्ति के उपरांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परमपूज्यनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर गुरूजी ने भारतीय वातावरण के अनुकूल संस्कारक्षम शिक्षण पद्धति विकसित करने का विचार किया। इस हेतु 1952 ई में गोरखपुर में प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई। मध्यप्रदेश में रीवा नगर में सन 1959 ई में प्रदेश का पहला सरस्वती शिशु मंदिर प्रारंभ किया गया ।प्रबंधन एवं मार्गदर्शन की दृष्टि से 1977 ई में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान नई दिल्ली की स्थापना की गई एवं महाकौशल प्रांत में सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल प्रांत जबलपुर की स्थापना की गई।

डॉ हरिसिंह गौर जैसे महानशिक्षाविद की जन्मभूमि एवं लाखा बंजारा की त्यागभूमि सागर नगर के सिविल लाईंस , रमझिरिया क्षेत्र में भी एक विद्यालय प्रारंभ करने की योजना बनाई गई। प्रो प्रभाकर राव पाटणकर , श्री अरूण जी पलनिटकर , प्रो . अविनाश जी अडोणी एवं श्री नचिकेता भावे ने विचार विमर्ष कर जुलाई 1993 ई में सिविल लाइंस क्षेत्र में रमझिरिया सरस्वती शिशु मंदिर सिविल लाइन सागर की नींव डाली । विद्यालय के प्रबंधन एवं संचालन हेतु राष्ट्रऋषि गुरू गोलवलकर गुरूजी के नाम पर माधव शिक्षा समिति की स्थापना 29 अक्टूबर सन 1993 ई. में की गई।

प्रारम्भ में विद्यालय में 03 कक्षाएं एलकेजी , यू के जी एवं प्रथम प्रारंभ की गई। जो प्रतिवर्ष कर्मश: एक कक्षा वृद्धि होते हुए आज हाईस्कूल की कक्षा 10 वीं तक संचालित है। इस संस्था के प्रथम नियमित प्रधानाचार्य श्री नरेन्द्र जी ठाकरे बने एवं प्रथम नियमित आचार्य वर्तमान प्राचार्य श्री सुरेन्द्र जी जैन बने । अपने उत्कृष्ट षिक्षण के कारण यह विद्याभारती द्वारा घोषित ‘आदर्ष विद्यालय’ है । विद्यालय प्रबंध समिति ने 1996 ई में विश्वविद्यालय की तलहटी में स्थित शासकीय पालीटेक्निक कालेज के सामने रमझिरिया क्षेत्र में भूमिक्रय कर विशाल विद्यालय भवन का निर्माण कराया । 1993 ई. से ही शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचता हुआ रमझिरिया प्रकल्प एक शैक्षिक शोध संस्थान जैसा विकसित हुआ है ।

वर्ष 1999 ई की प्राथमिक प्रमाण पत्र परीक्षा की जिला प्रावीण्य सूची में कक्षा 5 वी में अध्ययनरत 36 भैया - बहिनों में से 17 भैया बहिन ने प्रावीण्य सूची में स्थान अर्जित कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। तब से प्रतिवर्ष कक्षा 5 वी एवं 8वीं की प्रावीण्य सूची में इस संस्था के भैया बहिनों ने लगातार अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई।हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 2012 (विद्यालय में कक्षा 10 वीं का प्रथम बैच ) का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा , कक्षा में अध्ययनरत 53 विद्यार्थियों में से 49 प्रथम श्रेणी में,एवं शेष 04 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए , इनमें से 29 भैया बहिनों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित किए ।

शारीरिक , खेलकूद , बौद्धिक ,विज्ञान मेला ,विज्ञान माडल्स ,आचार्य शोध पत्र जैसी विधाओं में इस विद्यालय के भैया बहिनों एवं आचार्यों का सतत गौरवशाली परिणाम रहा है। प्रतिवर्ष अखिल भारतीय स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विद्यालय के भैया बहिनों का सराहनीय प्रदर्शन रहता है।

शिक्षण हेतु विद्यालय में निरंतर शिक्षण शोध कार्यशालाएं संचालित रहती है। विद्यालय के सभी षिक्षक कम्प्यूटर शिक्षण गतिविधि आधारित शिक्षण ,एवं क्रिया आधारित शिक्षण में प्रषिक्षित है।

संस्था में क्रीड़ा उद्यान , साइंस पार्क , 60 कम्प्यूटरों से युक्त कम्प्यूटर प्रयोगषाला , मल्टीमीडिया एजुकेषन सिस्टम ,गणित ,भौतिकी , रसायनषास्त्र , जीवविज्ञान की विषयवार पृथक - पृथक प्रयोगशालाएं हैं । शिशु कक्षाओं के उत्तम शिक्षण हेतु उनके कक्षा कक्ष में ही शिशु वाटिका एवं प्रयोगषाला स्थापित की गई है।

नवीन शैक्षणिक सत्र में शिक्षण एवं प्रवेश संबंधी निम्न सूचनाओं पर ध्यान देने का कष्ट करें ।

  • कक्षा अरूण से कक्षा दशम तक नवीन प्रवेश प्रारंभ है।
  • प्रवेश हेतु प्रवेश फार्म शुल्क रू. 50/- जमा कर विद्यालय कार्यालय से प्राप्त करें |
  • प्रवेश फार्म से भी डाउनलोड कर पूर्ण भरकर शुल्क रू. 50/- सहित विद्यालय कार्यालय में जमा करें।
  • कक्षा उदय उत्तीर्ण भैया बहिनों का प्राथमिक की कक्षा प्रथम, कक्षा पंचम उत्तीर्ण भैया बहिनों का माध्यमिक की कक्षा षष्ठ एवं कक्षा अष्टम उत्तीर्ण भैया बहिनों का हाईस्कूल की कक्षा नवम में पुनः प्रवेश होगा । पुनः प्रवेश हेतु नवीन प्रवेश फार्म भरकर पुनः प्रवेश शुल्क सहित विद्यालय कार्यालय में जमा करें।
  • विद्यालय कार्यालयीन समय

    1. दिनांक 15 जून से 15 अप्रैल तक प्रातः 9.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक 
    2. दिनांक 16 अप्रैल से दिनांक 14 जून तक प्रातः 8.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक 
  • प्रवेश संबंधी अभिलेख
    1. पूर्ण प्रविष्टियों सहित प्रवेश आवेदन फार्म 
    2. पिछली कक्षा उत्तीर्ण की अंकसूची की फोटो कापी 
    3. भैया बहिन का जन्मतिथि प्रमाण पत्र 
    4. दो फोटो पासपोर्ट साइज 
    5. स्थानांतरण प्रमाण पत्र की मूल प्रति 
    6. जाति प्रमाण पत्र की फोटो कापी
  • प्रवेश चयन परीक्षा

    नवीन प्रवेश सभी कक्षाओं में चयन परीक्षा के आधार पर दिए जावेंगे । चयन परीक्षा में मुख्यतः भैया - बहिन के बौद्धिक स्तर एवं मानसिक विकास स्तर का परीक्षण किया जावेगा.
  • शिशु विभाग कक्षा अरूण एवं उदय
    भैया - चाकलेटी हाफ पेन्ट , लाल चेक की शर्ट , काले जूते लाल मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद हाफ पेन्ट , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे बहिन - चाकलेटी टयूनिक , लाल चेक की शर्ट , काले जूते लाल मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद टयुनिक , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे शीतकाल में - चाकलेटी स्वेटर , लाल टोपा या स्कार्फ
    प्राथमिक विभाग - कक्षा प्रथम से पंचम तक
    भैया - नीला नेवी ब्लू पेन्ट , सफेद शर्ट , काले जूते लाल मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद पेन्ट , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे बहिन - नीला नेवी ब्लू टयूनिक , सफेद शर्ट , काले जूते लाल मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद टयुनिक , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे शीतकाल में - लाल स्वेटर , लाल टोपा या स्कार्फ
    माध्यमिक विभाग - कक्षा शर्ट से अश्टम तक
    भैया - खाकी पेन्ट , सफेद शर्ट , काले जूते खाकी मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद पेन्ट , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे बहिन - आसमानी स्काईब्लू कुर्ती , सफेद सलवार , सफेद चुनरी काले जूते सफेद मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद कुती , सफेद सलवार ,सफेद चुनरी ,सफेद जूते सफेद मौजे शीतकाल में - लाल स्वेटर , लाल टोपा या स्कार्फ
    हाईस्कूल विभाग - कक्षा नवम से दशम तक
    भैया - स्मोक ग्रे पेन्ट , सफेद शर्ट , काले जूते स्मोक ग्रे मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद पेन्ट , सफेद शर्ट , सफेद जूते सफेद मौजे बहिन - स्मोक ग्रे कुर्ती , सफेद सलवार , सफेद चुनरी काले जूते सफेद मौजे , बुधवार गुरूवार - सफेद कुर्ती , सफेद सलवार ,सफेद चुनरी ,सफेद जूते सफेद मौजे शीतकाल में - नीला नेवी ब्लू स्वेटर , नेवी ब्लू टोपा या स्कार्फ

1. कक्षा प्रथम से कक्षा दशम तक पाठय पुस्तकें मध्यप्रदेश पाठयपुस्तक निगम राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल से मुद्रित बाजार से क्रय करें। 
2. विद्याभारती से संचालित पाठयक्रम की पुस्तकें एवं सामग्री विद्यालय वस्तु भण्डार से प्राप्त करें ।
3. कापियों एवं अभ्यास पुस्तिकाओं की सूची विद्यालय सूचना पटल अथवा विद्यालय की बेबसाइट www.ssmramjhiriya.org से प्राप्त कर बाजार से क्रय करे।

प्रवेश शुल्क के अतिरिक्त कक्षावार निर्धारित मासिक शिक्षण शुल्क , वाहन शुल्क , एवं परीक्षा शुल्क देय होता है । जिसका भुगतान निर्धारित समय पर किया जाना आवष्यक है। शुल्क संबंधी जानकारी विद्यालय कार्यालय , सूचना पटल अथवा विद्यालय की बेबसाइट से प्राप्त की जा सकेगी।

ग्रीष्म अवकाश में विद्यालय में वैदिक गणित , अंग्रेजी स्पेाकन एवं ग्रामर , कम्प्यूटर शिक्षण हस्तकला , चित्रकला , संगीत , रांगोली , मेंहदी , संस्कृत संभाशण , इत्यादि विषयों की विषेश कक्षाएं एवं शिविर समर कैम्प इत्यादि कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किए जाते है। जिसकी जानकारी विद्यालय कार्यालय एवं बेबसाइट से प्राप्त की जा सकेगी।

सरस्वती शिक्षा परिषद द्वारा अनुशंसित कर्मचारी कल्याण की सभी योजनाएं रमझिरिया विद्यालय में प्रारंभ से ही लागू हैं - 
1. कर्मचारी भविष्य निधि योजना - कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सागर के नियमानुसार 
2. कर्मचारी परिवार पेंशन योजना - कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सागर के नियमानुसार 
3. कर्मचारी समूह बीमा योजना - भारतीय जीवन बीमा निगम जबलपुर एवं सरस्वती शिक्षा परिषद् जबलपुर के नियमानुसार 
4. ग्रुप ग्रेच्युटी बीमा स्कीम - भारतीय जीवन बीमा निगम जबलपुर एवं सरस्वती शिक्षा परिषद् जबलपुर के नियमानुसार 
5 अर्जित अवकाश-नगदीकरण - सरस्वती शिक्षा परिषद जबलपुर के नियमानुसार 
6. प्राचार्य,प्रधानाचार्य आवास भत्ता - सरस्वती शिक्षा परिषद जबलपुर के नियमानुसार 

माधव शिक्षा समिति , संचालक सरस्वती शिशु मंदिर रमझिरिया ,सागर की समिति स्वेच्छा से इस विद्यालय के मूल कर्मचारियों के कल्याण की दृष्टि से नई-नई योजनाएं बनाकर उन्हे लागू करना चाहती है .यहां पर रेखांकित की गई योजनाओं की समीक्षा 10 वर्ष में अथवा आवश्यकतानुसार उसके पूर्व की जावे जिससे कल्याण की योजनाओं का अधिकतम लाभ कार्यरत कर्मचारियों को मिल सके . माधव शिक्षा समिति के सदस्यों, पदाधिकारियों तथा अन्य अधिकारियों एवं उनके घर के बच्चों को इन योजनाओं का लाभ कभी नहीं दिया जावेगा |

कर्मचारी कल्याण की योजनाओं का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना है .जिससे उनमें कर्तव्यनिष्ठा , गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा संस्था के प्रति समर्पण भाव में विस्तार होगा .

सामान्य नियम

1. अधोलिखित योजनाओं का लाभ केवल विद्यालय में कार्यरत नियमित कर्मचारियों को ही प्राप्त होगा .
2. विद्यालय की आर्थिक स्थिति अनुरूप न होने की स्थिति में इन योजनाओं को स्थगित भी किया जा सकेगा.
3. किसी कर्मचारी के शिक्षकीय कार्य एवं समर्पण भाव में कमी ,अथवा कार्य - व्यवहार संतोषजनक न पाये जाने पर समिति उस कर्मचारी को विद्यालय द्वारा लागू की गई सभी या कुछ योजनाओं के लाभ से वंचित करेगी .
4. विद्यालय में स्थानांतरित कर्मचारियों के दो वर्ष के निरीक्षण काल के उपरांत ही उन्हे किन योजनाओं का लाभ दिया जावे इस पर समिति अलग से निर्णय लेगी .
5. समस्त विशेष योजनाओं, ऋणयोजनाओं तथा कुछ अन्य योजनाओं का लाभ विद्यालय के उन सभी पूर्व कर्मचारियों को इस विद्यालय मे स्थानांतरण पर देय नहीं होगा (a) जिनके इस विद्यालय से स्थानांतरण संस्था हित में किए गए थे ,तथा (b) जिनका पूर्व में इस विद्यालय में प्रशिक्षु आचार्य के रूप में नियमितिकरण नहीं हो पाया था.
विद्यालय में कर्मचारी कल्याण की निम्न तीन प्रकार की योजनाएं होंगी 
(अ) सामान्य योजनाएं 
(ब) विशेष योजनाएं
(स) ऋण योजनाएं 

(अ) सामान्य योजनाएं

इन योजनाओं का लाभ इस विद्यालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों को समान रूप से बिना किसी भेदभाव (वरिष्ठता आदि) के दिया जावेगा , जब तक की नियमों में अन्यथा न दिया गया हो | 
1. वेश आदि कर्मचारियों को वर्ष में दो बार क्रमशः गुरुपूर्णिमा उत्सव पर एवं गोलवलकर जयंती कार्यक्रम पर वेश दिए जावेंगे . यदि किसी कारण कार्यक्रम नहीं मनाये जाते है , तब वेश देय नहीं होगा अन्य ऋतु परिवर्तन पर विद्यालय का कार्य बाधित न हो इस हेतु कर्मचारियों को ठंड में इनर, स्वेटर, मफलर ,विद्यालय कक्ष के लिए जूते - मोजे आदि तथा वर्षा ऋतु में छाता, रेनकोट इत्यादि दिए जावेंगे | 
2.अवकाश इस बाबत परिषद द्वारा अनुमोदित सामान्य नियम लागू होंगे. अवकाश कर्मचारी को दी गई एक सुविधा है,न कि उनका अधिकार .अतः उन्हें अत्यावश्यक होने पर तथा पूर्व स्वीकृति पर ही मान्य किया जावेगा 
3. परिवार कल्याण योजनाएं कर्मचारी की संस्था के प्रति निष्ठा एवं समर्पण भाव में परोक्षरूप से उनके परिवार का भी बड़ा सहयोग होता हैं ,यह सर्वमान्य तथ्य है . इसे ध्यान में रखकर निम्न पांच योजनाओं को अंगीकार किया जाता है :- 
(क) छात्रवृत्ति : कर्मचारियों के बच्चों को अध्ययन एवं स्वाध्याय के प्रति अभिरुचि उत्पन्न हो इस हेतु उन सभी शालेय कक्षाओं (कक्षा अरुण से द्वादश तक के बच्चों को वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर प्राप्तांकों के आधार पर प्रतिवर्ष छात्रवृति दी जावेगी, जिससे उनकी अभिरुचि पठन - पाठन में बढ़ सके. कर्मचारियों के बच्चों को प्रोत्साहित करना ही छात्रवृत्ति का वास्तविक लक्ष्य है. छात्रवृत्ति योजना वार्षिक परीक्षा परिणाम 2011 से मान्य की जाती है .छात्रवृत्ति (की राशि शालेय शिक्षा शैक्षणिक स्तर पूर्व प्राथमिक , प्राथमिक , माध्यमिक , हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी के प्राप्तांको के आधार पर तालिका के अनुसार होगी | 

शैक्षणिक स्तर 80% या अधिक 60% या अधिक 45% या अधिक 45% से कम
हायर सेकेण्डरी कक्षा 11 एवं 12 4,000/- 3,000/- 2,000/- 1,000/-
हाईस्कूल कक्षा 9 एवं 10 3000/- 2,000/- 1,000/- 5,00/-
माध्यमिक कक्षा 6, 7 एवं 8 2,000/- 1,500/- 1,000/- 5,00/-
प्राथमिक कक्षा 3, 4 एवं 5 1,500/- 1,00/- 7,50/- 500/-
प्राथमिक कक्षा 3, 4 एवं 5 1,500/- 1,00/- 7,50/- 500/-

अटल टिंकरिंग लैब

  • शिक्षा का एक राष्ट्रीय प्रणाली विकसित करना जिसके कारण युवा पुरुषों और महिलाओं की एक पीढ़ी का निर्माण करने में सहायता मिलेगी ।
  • हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध हौ और देशभक्ति का जोश के साथ संचार ।
  • शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक रूप पूरी तरह से विकसित ।
  • सफलतापूर्वक दिन जीवन - स्थितियों की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम ।
  • गांवों , जंगलों, गुफाओं और मलिन बस्तियों में रहने वाले हमारे उन वंचित और बेसहारा भाइयों और बहनों को सामाजिक बुराइयों और अन्याय के बंधनों से मुक्त करवाना ।
  • इस प्रकार प्रति समर्पित , एक सामंजस्यपूर्ण, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए योगदान कर सकते हैं ।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। साधारण भाषा में गुरु वह व्यक्ति हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा मुहूर्त

जुलाई 16, 2019 को 01:50:24 से पूर्णिमा आरम्भ
जुलाई 17, 2019 को 03:10:05 पर पूर्णिमा समाप्त

1.  गुरु पूजा और श्री व्यास पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि को सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक व्याप्त होना आवश्यक है।
2.  यदि पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तो यह पर्व पहले दिन मनाया जाता है।

गुरु पूजन विधि

1.  इस दिन प्रातःकाल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों को करके उत्तम और शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
2.  फिर व्यास जी के चित्र को सुगन्धित फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए। उन्हें ऊँचे सुसज्जित आसन पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए।
3.  इसके बाद वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर कुछ दक्षिणा यथासामर्थ्य धन के रूप में भेंट करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा महत्व

पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था; ऐसी मान्यता है।

वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। धर्म में रुचि कम होने के कारण मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा। एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बाँट दिया जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति रखने वाले लोग भी वेदों का अध्ययन करके लाभ उठा सकें।

व्यास जी ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बाँटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद रखा। वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया।

वेदों में मौजूद ज्ञान अत्यंत रहस्यमयी और मुश्किल होने के कारण ही वेद व्यास जी ने पुराणों की रचना पाँचवे वेद के रूप में की, जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक किस्से-कहानियों के रूप में समझाया गया है। पुराणों का ज्ञान उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को दिया।

व्यास जी के शिष्यों ने अपनी बुद्धि बल के अनुसार उन वेदों को अनेक शाखाओं और उप-शाखाओं में बाँट दिया। महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना भी की थी। वे हमारे आदि-गुरु माने जाते हैं। गुरु पूर्णिमा का यह प्रसिद्ध त्यौहार व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

1.  इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु परिवार में जो भी बड़ा है अर्थात माता-पिता, भाई-बहन, आदि को भी गुरु तुल्य समझना चाहिए।
2.  गुरु की कृपा से ही विद्यार्थी को विद्या आती है। उसके हृद्य का अज्ञान व अन्धकार दूर होता है।
3.  गुरु का आशीर्वाद ही प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगल करने वाला होता है। संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है।
4.  गुरु से मन्त्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
5.  इस दिन गुरुजनों की यथा संभव सेवा करने का बहुत महत्व है।
6.  इसलिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक जरूर मनाना चाहिए।

हम आशा करते हैं कि यह गुरु पूर्णिमा आपके लिए अत्यन्त शुभकारी रहे। गुरु पूर्णिमा की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

गतिविधियाँ

राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मेला - 
  

छात्रों में विज्ञान, वैदिक गणित तथा संस्कृति के प्रति रूचि संवर्धन हो, इस हेतु से विद्याभारती महाकोशल प्रान्त के निर्देशन में छात्र अपने विद्यालय, संकुल तथा प्रांतीय ज्ञान-विज्ञान मेले में अपना कौशल दिखा कर, क्षेत्रीय स्तर पर स्थान प्राप्त करके राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मेले में प्रतिभागिता करते हैं। छात्रों में इस मेले द्वारा जो उर्जा संचरित होती है, वही हमारी बहुमूल्य निधि है, जिसे हम ऐसे आयोजनों के माध्यम से सुरक्षित रखते हैं। 

अखिल भारतीय खेल-कूद प्रतियोगिताएँ -  

‘शरीरमाधं खलु धर्म साधनम’ इस ध्येय वाक्य का स्मरण करते हुए अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु शरीर की महत्ता को केंद्र में रखकर विद्या भारती बालको के सवर्गिण विकास हेतु खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है। विद्यालय, संकुल, प्रांत तथा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छात्र राष्ट्रीय खेल-कूद प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करता है।

संस्कृति ज्ञान परीक्षा - 

हमारी भारतीय संस्कृति सबसे प्राचीन संस्कृति है। संस्कृति ही जीवन का आधार होती है। वर्तमान शिक्षा पद्धति से संस्कृति का यह भाव समाप्त होता जा रहा है। उसी मूल भाव को पुनजागृत करने हेतु छात्रों को अपनी संस्कृति का बोध कराना परम आवश्यक है। इसी निमित्त विद्या भारती कक्षा चौथी से बारहवी के छात्रों एवं आचार्यों के लिए इस परीक्षा का आयोजन करती है।

आचार्य विकास एवं प्रशिक्षण वर्ग - 

शिक्षा एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है, कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं हो सकता, आजीवन सीखने की संभावनाएं उनमे बनी ही रहती हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर विद्या भारती महाकोशल प्रान्त द्वरा प्रतिवर्ष "आचार्य विकास वर्ग” एवं विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जाता है |

संस्कार केंद्र - 

शिक्षा एवं संस्कार के अभाव में बालक के पथ-भ्रष्ट होने की संभावनायें बनी रहती हैं, अत:विद्या भारती की योजना अनुसार समाज में जो वंचित एवं उपेक्षित क्षेत्र है उन तक अच्छी शिक्षा तथा अच्छे संस्कार पहुँचे, इस निमित विद्यालयों के माध्यम से बाल संस्कार केन्द्रों का संचालन यह समिति अनेक वर्षों से करती आ रही है।

कलेण्डर

खेल

विज्ञान

बौद्धिक

बार्षिक कार्ययोजना

चित्रावली

सम्पर्क सूत्र

Send Us a Message

Name
Email
Subject
Description

Find Us

 
  • Address:जबलपुर
  • Phone: 
  • Mobile:9425383345
  • Email: parishdjbp@gmail.com